राज्यसभा सांसद सतनाम संधू ने संसद में पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास का मुद्दा उठाया. उन्होंने बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी को और अधिक मजबूत करने की मांग की. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों, युवाओं और स्थानीय लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाए. सांसद संधू ने शून्यकाल में कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले एक दशक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम शामिल है. इस कार्यक्रम के तहत 1 हजार करोड़ रुपये के बजट से 19 सीमावर्ती इलाकों के 3 हजार गांवों का विकास किया जा रहा है. 2025 के केंद्रीय बजट में सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए 87% की बढ़ोतरी की गई है.

राज्यसभा सांसद सतनाम संधू ने पंजाब के सीमावर्ती जिलों (फिरोजपुर, गुरदासपुर, फाजिल्का, अमृतसर और तरनतारन) के लोगों को देश की ‘प्रथम रक्षा पंक्ति’ करार देते हुए कहा कि यहां के नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, नशा तस्करी और गोलीबारी जैसी चुनौतियों का जिक्र किया, जिससे यहां खेती करना कठिन हो गया है.

सांसद संधू ने कहा कि किसानों को सिंचाई की समस्याओं, कृषि संसाधनों की कमी और फसल बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. उनकी रसद लागत बढ़ जाती है, जिससे उन्हें अपनी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल पाता. उन्होंने कहा, सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार आवश्यक है.

युवाओं को रोजगार और व्यवसाय के अवसर मिलें

सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत अधिक से अधिक गांवों को कवर करे, मेगा फूड पार्क परियोजनाओं को लागू करे. युवाओं में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए अटल इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किया जाएं. उन्होंने युवाओं के कौशल विकास और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने और हर जिले में अटल इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता फैलानी चाहिए. नीति आयोग के सहयोग से सीमावर्ती कॉलेजों में इनक्यूबेशन सेंटर खोलने चाहिए, जिससे युवाओं को रोजगार और व्यवसाय के अवसर मिलें.

सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को गति देने की अपील

सांसद संधू ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि सीमावर्ती जिलों में मेगा फूड पार्क परियोजनाओं को लागू किया जाए. ताकि किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य मिल सके और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिले. उन्होंने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, जन शिक्षण संस्थान योजना और राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना को सीमावर्ती जिलों में विस्तारित करने की मांग की.

सीमावर्ती इलाकों को मिले ‘भारत का पहला गांव’ का दर्जा

सांसद संधू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों को अब ‘भारत का अंतिम गांव’ नहीं, बल्कि ‘भारत का पहला गांव’ कहा जाता है. उन्होंने सरकार द्वारा आधुनिक निगरानी प्रणाली और एंटी-ड्रोन तकनीक की स्थापना के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया, जिससे घुसपैठ और नशीली दवाओं की तस्करी पर नियंत्रण हुआ है. सांसद ने केंद्र सरकार से सीमावर्ती क्षेत्रों में रह रहे नागरिकों की बेहतरी के लिए ठोस कदम उठाने और इन क्षेत्रों को सामाजिक-आर्थिक विकास की मुख्यधारा में शामिल करने की अपील की.

ये लोग देश के नागरिक ही नहीं, बॉर्डर वारियर भी हैं

सांसद संधू ने कहा, सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले पंजाबी भारत की पहली डिफेन्स लाइन हैं, जो हमारी सेनाओं के साथ मिलकर देश के लिए लड़ते रहे हैं. पंजाब की पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो राज्य के फिरोजपुर, गुरदासपुर, फाजिल्का, अमृतसर और तरनतारन जिलों में फैली हुई है. इन क्षेत्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा, नशीले पदार्थों की तस्करी, भूमिहीनता, माइग्रेशन और किसानों और यहां रहने वाले लोगों की कुछ गंभीर समस्याएं हैं. इन सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग न केवल देश के नागरिक हैं, बल्कि वो बॉर्डर वारियर हैं. पंजाब के निवासियों ने 1965 और 1971 के युद्धों में बेजोड़ बहादुरी दिखाई है.